नागरिकता ( संशोधन ) अधिनियम, 2019

नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019
नागरिकता (संशोधन) अधिनियम 2019, बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में प्रताड़ित धार्मिक अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता प्रदान करने से सम्बंधित है । इन देशों में पिछले कई दशकों से हिन्दुओं, सिख, जैन, बौद्ध और पारसी लोगों के साथ शारीरिक एवं मानसिक उत्पीड़न हो रहा है । इसलिए इन धर्मों के अनुयायी समय-समय पर विस्थापित होकर भारत आते रहे हैं । तकनीकी तौर पर उनके पास भारत की नागरिकता हासिल करने का कोई ठोस दस्तावेज उपलब्ध नहीं होता है ।
अतः एक भारतीय नागरिक को मिलने वाली सुविधाओं से वह वंचित ही रहे हैं । धार्मिक आधार पर भेदभाव एक शर्मनाक घटना है । जिसका किसी भी राष्ट्र में होना वहां के मानवीय मूल्यों का ह्रास दर्शाता है । पाकिस्तान की नेशनल असेम्बली के अनुसार हर साल 5,000 विस्थापित हिन्दू भारत आते हैं । (डॉन,13 मई,2014)  यह संख्या आधिकारिक आंकड़ों से बहुत ज्यादा है । हमारे पड़ोसी देशों में अल्पसंख्यकों खासकर हिन्दुओं को जबरन धर्म परिवर्तन , नरसंहार , बलात्कार और संपत्तियों पर अवैध कब्जा सहना पड़ता है । इन सबसे बचकर जब वह भारत आते हैं , तो यहां उन्हें शिक्षा , स्वास्थ्य और दूसरी मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल सकती । यह पूर्ण रूप से मानवीय अधिकारों का हनन है ।

नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019
Citizen Amendent Bill - 2019

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नागरिकता (संशोधन) अधिनियम-2019

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